विश्व के सबसे विशाल उड़ने वाले पक्षी

0

विशाल डायनासोर हमेशा से ही लोगो को आकर्षित करते हैं |और अगर डायनासोर उड़ने वाला हो तो रोमांच दुगना हो जाता है |

छह मिलियन साल पहले डायनासोर विलुप्त होने के बाद, विशाल पक्षी पृथ्वी के कई क्षेत्रों में शासन करने लगे। लाखों साल पहले, धरती पर कई आश्चर्य जनक जीव मौजूद थे ओर उनके अवशेष आज भी जीवाश्म के रूप में सुरक्षित है , अभी भी नए जीवाश्म मिलते रहते हैं और हमे चकित करते रहते हैं । वैज्ञानिको को ऐसा ही एक विशाल पक्षी का जीवाश्म मिला है जो डायनासोर के बाद के काल पाया जाता था। यह पक्षी वास्तव में डायनासोर नहीं थे पर इनके विशाल आकार के कारण इन्हें उड़ने वाले डायनासोर भी कह दिया जाता है |



क्या आप सोच सकते हो की यह पक्षी कितना बड़ा होगा ?


कैलिफोर्निया बर्कले विश्वविद्यालय के जीवाश्म शोधकर्ताओं ने पाया है कि यह पक्षी 21 फीट ऊंचा था और इसके दांत हॉकसॉव जैसे थे जो पृथ्वी के दक्षिणी महासागरों में पाए जाते थे।



पृथ्वी के इतिहास में सबसे बड़ा पक्षी –


इस सप्ताह, जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में शामिल पेलियोन्टोलॉजिस्ट का कहना है कि उन्होंने इतिहास में सबसे लंबी प्रजातियों की पक्षी की खोज की है। इस पक्षी के जीवाश्म, जिन्हें पेलेगोर्निथिड्स के रूप में पहचाना जाता है, यह 1980 के दशक में अंटार्कटिका के क्षेत्र में पाए गए थे।यह जीवाश्म अब तक पाए गये सभी जीवाश्मो में सबसे विशाल है |





इसके दांत और चोंच किस प्रकार के थे –



प्रागैतिहासिक पक्षियों के इस जीवाश्म में, शोधकर्ताओं ने उनके पैर की हड्डी, जबड़े की हड्डी जो अंटार्कटिका के सेमोर द्वीप में पाई गई थी का अध्यन किया । पेलागोर्निथिड्स को हड्डियों के साथ दांत के रूप में भी जाना जाता है इनके दांत सो जैसे होते थे और लम्बी सी चोंच होती थी ये चोंच उन्हें समुद्र से मछलियों के शिकार में सहायता करती थी |

इनका रंग रूप कैसा था –

इनके रंग रूप के बारे में कुछ भी अनुमान लगाना अत्यंत मुश्किल है क्यूंकि इनके वंश का कोई भी निशान नहीं बचा है पर ऐसा अनुमान है की इन पक्षियों में आमतौर पर पाए जाने वाले एकमात्र रंग काले, सफेद और भूरे रंग के हो सकते हैं हैं। कुछ में इंद्रधनुषी पंख, या भूरा या लाल रंग के रंग के धब्बे भी हो सकते हैं|



सबसे बड़े आकार का जीवाश्म –


बर्कले के शोधकर्ताओं ने जीवाश्म के आकार को मापा और पाया कि पैर की हड्डी पेलागोर्निथिड समूह की विलुप्त प्रजातियों में सबसे बड़ा नमूना है। इन के विशाल जबड़े को देखकर कहा जा सकता है कि ये इस समूह में पाए जाने वाले पक्षियों में सबसे बड़े पक्षी की हड्डी है |



कितने पुराने जीवाश्म हो सकते है यह –



इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता पीटर क्लोज़ कहते हैं कि अंटार्कटिका में पाए जाने वाला जीवाश्म न केवल दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी हो सकते हैं, बल्कि ये इओसीन युग के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी भी हो सकते हैं | शोधकर्ताओं ने पाया कि जीवाश्म कम से कम 50 मिलियन वर्ष पुराना था। जबकि जबड़े की हड्डी लगभग चार मिलियन साल पुरानी है।





यह पक्षी धरती पर किस युग में पाए जाते थे –


जीवाश्मो की जांच के बाद पता चलता है कि यह पक्षी सेनेज़ोइक युग के थे, जो पृथ्वी पर एक क्षुद्रग्रह के टकराने के बाद का समय था। इस क्षुद्रग्रह के टकराने के बाद ही डायनासोर लगभग पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। शोधकर्ताओं को उनकी खोज से पता चला है कि इस प्राणी के पंख 5मीटर से 6 मीटर तक बड़े थे। इन पक्षियों के विशाल आकर को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि ये पक्षी तेजी से विशाल आकार में विकसित हुए और उन्होंने लाखों वर्षों तक पृथ्वी के सातों समुन्दरो पर राज किया |




ये जानवर विलुप्त कैसे हुए –


जैसा की ज्ञात होता है की यह जानवर मानव सभ्यता के उदय से पूर्व ही लुप्त हो गए थे तो आखिर ऐसा क्या हुआ की इतना विशाल जीव एक दम से लुप्त हो गया –
पेलेगोर्निथिड्स अक्सर समुद्र पार करने के लिए ज्ञात एल्बाट्रॉस से जुड़े होते हैं। लेकिन पेलागोर्निथिड्स अल्बाट्रॉस के आकार से दोगुना थे। अध्ययन से यह पाया गया कि इन जीवों में बहुत विविधता थी।

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply

Captcha

ScienceShala
Logo
Enable registration in settings - general