अंटार्टिका की ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ का भविष्य: एक नए युग की शुरुआत

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Environment Science

परिचय

अंटार्टिका की थ्वेट्स ग्लेशियर, जिसे ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ के नाम से जाना जाता है, पृथ्वी के सबसे बड़े और सबसे तेजी से पिघलने वाले ग्लेशियर में से एक है। यह ग्लेशियर अंटार्टिका के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 192,000 वर्ग किलोमीटर है। थ्वेट्स ग्लेशियर की विशेषता यह है कि यह ग्लेशियर समुद्र के स्तर से नीचे है और इसका अधिकांश हिस्सा पानी में डूबा हुआ है।

थ्वेट्स ग्लेशियर का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह ग्लेशियर समुद्र के स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि यह ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जाए, तो यह समुद्र के स्तर को लगभग 0.5 मीटर तक बढ़ा सकता है, जिससे दुनिया भर में तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और तटीय अपरदन हो सकता है।

थ्वेट्स ग्लेशियर की वर्तमान स्थिति

थ्वेट्स ग्लेशियर की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। ग्लेशियर का पिघलने की दर पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ी है, जिससे ग्लेशियर का आकार कम हो रहा है। ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र के स्तर में वृद्धि हो रही है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और तटीय अपरदन का खतरा बढ़ रहा है।

थ्वेट्स ग्लेशियर के पिघलने के कारणों में से एक है समुद्र के तापमान में वृद्धि। समुद्र के तापमान में वृद्धि से ग्लेशियर के नीचे की बर्फ पिघलने लगती है, जिससे ग्लेशियर का आकार कम हो जाता है। इसके अलावा, ग्लेशियर के ऊपरी हिस्से में बर्फबारी में कमी भी ग्लेशियर के पिघलने में योगदान कर रही है।

थ्वेट्स ग्लेशियर के अध्ययन के लिए अभियान

थ्वेट्स ग्लेशियर के अध्ययन के लिए एक अभियान शुरू किया गया है, जिसमें लगभग 40 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। यह अभियान अंटार्टिका के तेजी से पिघलने वाले ग्लेशियर का अध्ययन करने के लिए एक आइसब्रेकर पर सवार होकर अंटार्टिका की यात्रा कर रहा है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य थ्वेट्स ग्लेशियर के पिघलने की दर और इसके कारणों का अध्ययन करना है। वैज्ञानिक ग्लेशियर के पिघलने की दर को मापने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें ग्लेशियर के ऊपरी हिस्से में बर्फबारी की माप और ग्लेशियर के नीचे की बर्फ की माप शामिल है।

निष्कर्ष

थ्वेट्स ग्लेशियर की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और इसके पिघलने की दर में वृद्धि समुद्र के स्तर में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण है। थ्वेट्स ग्लेशियर के अध्ययन के लिए अभियान से हमें ग्लेशियर के पिघलने की दर और इसके कारणों के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी, जिससे हम समुद्र के स्तर में वृद्धि के प्रभावों को कम करने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं।

इसलिए, थ्वेट्स ग्लेशियर के अध्ययन के लिए यह अभियान बहुत महत्वपूर्ण है और इसके परिणाम हमें समुद्र के स्तर में वृद्धि के प्रभावों को कम करने में मदद करेंगे।

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