मार्स पर मिला जल का भंडार जानिए क्या है,तर्क

short info:- एलॉन मुस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति में से एक है,आपको बता दें कि उनका सपना है कि मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने का है, आपको बता दें की एलॉन मुस्क ने इस साल फरवरी में उन्होंने ऐलान किया था की तीसरे विश्व युद्ध से पहले इंसानी कॉलोनी बसा देंगे।

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आपको बता दें कि सिर पहलवान मौत की नहीं बल्कि अमेरिका चीन और साथी रूस समेत कई ऐसे देश है जो मंगल ग्रह पर जिंदगी खोज रहे हैं, वही देखें कि जितने भी लोग मंगल ग्रह पर बस्ती बसाना चाहते हैं

उनके लिए एक खास खुशखबरी है, और वो खुशखबरी की खबर क्या है,इसके पीछे की सच्चाई है आइए अब हम आपको बताते हैं

क्यों मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने का बात किया जा रहा है।

जानकारों के मुताबिक एस्ट्रॉयड के टकराने से पृथ्वी पर भारी तबाही मच सकती है,और इस वजह से मानव प्रजाति का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो सकता है,ऐसे में इंसानों को धरती के अलावा एक और ग्रह पर बसाने से उनकी मौजूदगी तो बरकरार रह सकेगी।

वहीं यदि बात करें मंगल ग्रह पर बसने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जाएगा जो आने वाले वक्त में पृथ्वी पर जीवन को सुधारने में इस्तेमाल की जा सकती है।

इसमें कई तरह की दवाइयों से लेकर खेती के तरीके भी शामिल हो सकते हैं, अंतरिक्ष का पता लगाने के लिए मानवता की आकांक्षाएं हम इंसानों को और अधिक एडवांस टेक्नोलॉजी की खोज करने की ओर ले जाएगी।

यह वजह है कि मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने को लेकर नसीब सपने देखे जा रहे हैं बल्कि इसे हकीकत में बदलने के लिए लगातार खोज की जा रही है।

आपको बता दे इसी खोज के दौरान ऐसा दावा किया गया है,
जो कि बेहद चौंकाने वाला है,यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने बुधवार को ऐलान कि उसे मंगल ग्रह के ग्रैंड कैनियान में बड़ी मात्रा में पानी छिपा मिला है।

आप को बता दे कि मंगल पर पानी की खोज एक्सो मार्स गैस ऑर्बिटर ने किया है, और इस खोज में सबसे अच्छी बात यह है कि पानी का विशाल भंडार वल्लेस मरिनर्स के सतह के मात्र 3 फीट नीचे मिला है।

वल्लेस मरिनर्स एक विसाल घाटी है, जो कि 3862 किलोमीटर इलाके में फैली हुई है यह घाटी पानी से भरे एक इलाके की तो इसका आकार नीदरलैंड के आकार के बराबर है।

सबसे पहले अमेरिकी एजेंसी नासा ने साल 2006 मे तस्वीरें जारी करके कहा था कि मंगल ग्रह पर पानी के साक्ष्य मिले हैं, तस्वीरों से पता चला था कि साल 1999 और 2001 के बीच में लिक्विड वाटर मंगल पर मौजूद है।

सन 21 जुलाई सन 2008 नासा के फोनिक्स मार्स लैंडर ने इस बात पुष्टि की कि मंगल ग्रह पर बर्फ मौजूद है, और इस बर्फ में भी वही तत्व पाए गए जो धरती पर मौजूद पानी में है, लाल ग्रह पर कई सूख चुके घाटियां और नदियों के इलाके भी हैं।

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जिसे अनुमान जताया जा रहा है, वहां कभी पानी बेहता या। आपको बता दें कि नासा का रोवर मार्स अभी घूम रहा है, ताकि जूजेरो क्रिएटर्स में खुदाई की जा सके, यह झील 3.30अरब साल पहले पानी से भरी हुई थी।

अभी तक जो पानी मिला था वो बर्फ की शक्ल में गहराई में इस ताजा खोज से पता चला है कि सतह से मात्र 3 फुट नीचे बर्फ मौजूद है, जाहिर सी बात है कि मंगल पर मिला पानी धरती जैसा तो नहीं होगा।

लेकिन बर्क के रूप में विशाल भंडार मौजूद है, इसलिए कहा जा रहा है कि मंगल ग्रह पर इंसानी बस्तियां बसाने का सपना थोड़ा और ज्यादा हकीकत की तरफ आगे बढ़ रहा है।

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