पानी से बिजली कैसे बनती है (How electricity generated from water ?)

रोटी , कपड़ा , और मकान  के साथ आजकल बिजली में इंसान की आम ज़रुरतो में से एक हो गई हो ,मोबाइल चार्ज करने से लेकर बड़ी बड़ी मशीने  चलाने के लिए बिजली ज़रूरी होती है ऐसे में यह सवाल आपके मन में ज़रूर आता होगा ,की आखिर यह बिजली आती कहाँ से है आखिर यह बनती कैसे है |आज हम आपके इसी सवाल का जवाब लेकर आए है |

बिजली को कहीं तरह से बनाया जाता है ,.जैसे पानी से , विंड मिल में हवा के बहाव से . कोयले से ,नाभीकीय रिएक्टर से  | आज हम बात करने वाले है , पानी से बिजली बनाने के बारे में | पानी ऊर्जा का एक नवीनी कृत (renewable source )  स्त्रोत है |

सबसे पहले बात करते हैं की पानी से बिजली कैसे  बनाई जाती है …पानी से बिजली बनाने के लिए नदियों के ऊपर डेम बनाकर उनके बहाव को रोका जाता है, .फिर इस पानी के बहाव का इस्तेमाल कर बिजली का निर्माण किया जाता है| पानी से बिजली बनाने वाले प्लांट को  हैड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट कहते है|. हैड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट बनवाने में शुरुवात में तो अच्छा खासा पैसा लगता है, लेकिन जब एक बार ये पॉवर प्लांट लग जाता है तो इससे पैदा होने वाली बिजली की कास्ट कम आती है |..इस तरह के हैड्रोक्लोरिक पॉवर प्लांट ऐसे जगहों में बनाये जाते है जहा पर बरसात या बर्फ के पानी को बांध बनाकर इकठ्ठा किया जा सके और फिर हैड्रोक्लोरिक पॉवर प्लांट में पानी को एक उचित स्थान पर इकठ्ठा करके ऊंचाई से लगे turbine के पखुडियो में गिराया जाता है.| जिसकी वजह से  turbine तेजी से घुमने लगता है….. तो उसमे लगा जेनरेटर इलेक्ट्रिक एनर्जी क्रिएट करता है| .यहाँ आपका यह जानना भे ज़रूरी है की टरबाइन क्या होती है –  एक लोहे की मोटी शाफ़्ट  पर बहुत सारे पंखे लगे होते हैं ,इसे ही टरबाइन कहते हैं | जब इन पंखों से पानी, हवा या गर्म भाप आदि टकराते हैं तो ये पंखे घुमने लग जाते हैं  और जब टरबाइन घूमता है तो इसकी शाफ़्ट  के साथ जुडी कुंडली भी घुमने लग जाती है .जिससे बिजली बनना शुरु हो जाती है| .टरबाइन के बाद आपको अल्तिनेटर के बारे में भी जानना ज़रूरी है | बिजली घर में जनरेटर के द्वारा बिजली का उत्पादन किया जाता है यहाँ  mechanical energy को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में चेंज किया जाता है |जनरेटर के अन्दर के भाग को ही अल्टरनेटर कहा जाता है इसमें दो शक्तिशाली चुम्बक होते है और चुम्बको के मध्य एक कुंडली होती है जिस पर तांबे के तार लपेटे हुए होते है |इस आल्टरनेटर ने अन्दर ही बिजली का निर्माण  होता है |.

आप इस क्रिया को सरल शब्दों में इस तरह समझ सकते है की  जब आप छोटे पंखे की मोटर घुमाते हैं तो मोटर के धनात्मक और ऋणात्मक तारों में सक्रियता पैदा हो जाती है, और इस तरह आप जब पंखे को घुमाते हैं, तब  आप इसमें एक छोटा बल्ब जोड़कर जला सकते हैं,  ठीक इसी तरह बड़ी बड़ी मोटर की सहायता स अधिक मात्रा में बिजली उत्पन्न की जा सकती है | जिसका उपयोग हम दैनिक उपयोग में कर सकते है  | इस बिजली को तारो के माध्यम से बिजली को खम्बो तक पहुँचाया  जाता है और फिर इन खम्बो से बिजली हमारे घरो तक आती है  |और हमारी दुनिया को रोशन कर देती है  |

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