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शनी गृह के छल्ले कैसे बने है (How are Saturn’s rings formed?)

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शनी हमारे सौर मंडल का जुपीटर के बाद दूसरा सबसे बड़ा गृह है , शनि को उसके खूबसूरत छल्लो की वजह से सौर मंडल का गहना भी कहा जाता है | वैसे ऐसा नहीं है की केवल शनि के पास ही यह छल्ले है , जुपिटर , यूरेनस , नेच्युन के पास भी यह रिंग है , लेकिन शनी के छल्ले सबसे ज्यादा बढे और चमकदार है |  गेलिलियो ने सबसे पहले इन छल्लो की खोज की थी , उन्हें यह छल्ले तब दिखे  जब सन 1610 में  वह अपनी दूरबीन से ब्रह्माण्ड (Space ) को देख रहे थे | तब से आज तक 400 साल हो चुके है , और आज भी वैज्ञानिक इन छल्लो के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते है , वो लगातार इन छल्लो के बारे में जानकारी जुटाने की कोशीश में लगे हैं |

शनी गृह के छल्ले किससे बने है (What are the rings of Saturn made of? )

ऐसा कहा जाता है की शनि गृह के छल्ले उल्कीय पत्थर ( Meteroid stones ) से बने है | काफी सालो तक इन पर रिसर्च की गई , और अब वैज्ञनिक कम से कम इतना तो जानते ही है की यह छल्ले बर्फ और चट्टानों के टुकडो से मिलकर बने है | सभी टुकडो का आकार अलग अलग है , कुछ गेंहू के दाने जितने छोटे है तो कुछ एक घर जितने बड़े | लेकिन अभी तक वैज्ञानिको में इस बात को लेकर मतभेद है की इन छल्लो का निर्माण कब हुआ होगा ? उनके अनुसार इन छल्लो का शनी गृह के उपग्रहों से ज़रूर कोई सम्बन्ध होगा | पृथ्वी का केवल एक चन्द्रमा है जबकि शनी के एक दो नहीं बल्कि 60 चन्द्रमा ( Satellite ) है | और यह सभी चन्द्रमा शनी के चारो और एक कक्षा (Orbit ) में गति कर रहे है | कई बार उल्का पिंड इन उपग्रहों से टकरा जाते होंगे और छोटे छोटे टुकडो में टूटकर बिखर जाते होंगे | और शनी के चारो और इन छल्लो का निर्माण इन्ही टुकडो की वजह से हुआ होगा | ऐसा भी कहा जाता है की जब सूर्य का निर्माण हुआ था शायद उस वक्त के अवशेष ही आज छल्लो के रूप में शनी के चारो और मौजूद  हैं |

शनी के कितने छल्ले है (How many rings are there in Saturn ? )

काफी पहले तक ऐसा माना जाता रहा की शनी गृह के 7 छल्ले है | हर छल्ले को इंग्लिश वर्णमाला ने से एक अक्षर का नाम दिया गया | छल्लो को उसी क्रम में नाम दी गए जिस क्रम में उन्हें ढूँढा गया था  | जिस छल्ले की खोज सबसे पहले हुई थी उसे  A नाम दिया गया है | पर यह छल्ला न तो शनी के बहुत करीब है और न बहुत दूर | कई छल्ले एक दुसरे से काफी पास है तो कई के बीच में काफी सारा खाली स्थान है | यह छल्ले एक जगह स्थिर नहीं रहते बल्कि शनी के चारो और चक्कर लगाते रहते है | यह सभी छल्ले काफी तेज़ गति से शनी की परिक्रमा करते हैं  |अगर हम इन छल्लो को बहुत पास से देखे तो हम पाएंगे की एक बड़ा छल्ला कई सारे छोटे छल्लो से मिलकर बना हुआ है | छोटे छल्लो को ringlet कहा जाता है  | उम्मीद है की आने वले दिनों में कई और छल्लो की खोज की जा सकेगी |

शनी गृह में क्या ख़ास है ( What is special in Saturn ?)

शनी पृथ्वी की तुलना में काफी बड़ा है | शनी गृह कितना विशाल है इसका अंदाज़ा इस बात से लगा सकते है की शनी गृह में 700 से ज्यादा पृथ्वी समां सकती है | शनी के यह छल्ले कई हज़ार मील तक फैले हुए है | अगर हम कार लेकर अन्तरिक्ष में जाए तो शनी गृह के कुछ छल्लो को पार कर्ण एमे ही हमें एक हफ्ता लग जाएगा , वो भी बिना रुके | जबकि दूसरी तरफ यह छल्ले काफी पतले हैं , यह केवल 30 से लेकर 300 फीट तक ही चौड़े है  | cassini नासा (NASA ) का सबसे नया स्पेस क्राफ्ट है जो की शनी की जानकारी लेकर आया है | cassini ने 1997 में पृथ्वी से शनी के लिए उडान भरना शुरू किया था , और वो शनी की सतह पर 2004 में पहुँच पाया था | तब से यह स्पेस क्राफ्ट शनी गृह की परिक्रमा कर रहा है | cassini अक्सर शनी की कई आश्चर्य जनक तस्वीरे भेजता रहता है | और उम्मीद है की आगे चलकर हम शनी

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