
सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने तैयार की है आर्टिफिशियल स्कैन| यह स्किन इंसानों की स्क्रीन की तरह दिखने वाली आर्टिफिशियल स्किन है|यह स्क्रीन बहुत ही सेंसिटिव, मजबूत एवं पतली है किंग अब्दुल यूनिवर्सिटी (King Abdullah University) के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इलेक्ट्रॉनिक स्किन (E-skin) है और यह E-skin 1-सेकेंड से भी कम समय में खुद को रिपेयर कर सकती है साथ ही यह आर्टिफिशियल स्कैन 5000 बार तक खुद को रिपेयर कर सकती है|
यह स्क्रीन बहुत सेंसिटिव है
वैज्ञानिक डॉ यीचेन काय का कहना है स्किन के छूने पर तापमान का घटने-बढ़ने पर सेंसेटिव होना जरूरी है हमारे द्वारा तैयार की गई E-skin 8 इंच की दूरी से भी चीजों को महसूस कर सकती है|
यह स्किन मजबूत एवं पतली है
वैज्ञानिक डॉ यीचेन काय बताते हैं कि इस स्किन में 2D टाइटेनियम carbondi Mxene sensor का प्रयोग किया गया है साथ ही इसमें नैनोवायर भी लगाया गया है|
स्किन में रिकवरी तेजी से होती है

रिसर्च से जुड़े डॉ शेन का कहना है कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है कि हमने इंसान की स्किन की तरह काम करने वाली E-skin को तैयार किया|इसमें मौजूदा हाइड्रोजेल में 70 फ़ीसदी से अधिक पानी है जिसके कारण रिकवरी तेजी से होती है|
यह skin शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखती है

यह E-skin शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर नजर रखती हैं जैसे हाई ब्लड प्रेशर का बदलना यह E-skin ऐसी जानकारियां खुद के अंदर स्टोर करके रखती है और wifi की मदद से इंसानों से साझा करती है
स्किन का प्रोस्थेटिक तौर पर होगा इस्तेमाल

शोधकर्ताओं का कहना है कि electronic skin त्वचा या E-त्वचा अगली पीढ़ी के प्रोस्थेटिक, व्यक्तिगत चिकित्सा, सॉफ्ट रोबोटिक और कृत्रिम बुद्धिमता (artificial intelligence) के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है|
इससे पहले आ रहे माइटी विश्वविद्यालय बनाई थी इलेक्ट्रॉनिक त्वचा

आपको बता दी इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में RMIT विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम त्वचा विकसित की थी जो वास्तविक त्वचा की तरह ही दर्द के प्रति प्रतिक्रिया देती है जिस से बेहतर प्रोस्थेटिक्स, स्मार्ट रोबोटिक्स और त्वचा के लिए गैर आक्रमक विकल्प का रास्ता खुल जाता है|
Related News
जीव विज्ञान में गहराई से संरक्षण और क्रोमैटिन संगठन
CTET Admit Card 2026: क्या आपका हॉल टिकट आ गया? 😱 एग्जाम सेंटर जाने से पहले ये ‘Pro-Tips’ और गाइडलाइन्स जरूर देख लें!
हिमनदों का अध्ययन: कृत्रिम हिमनद और अन्य तकनीकें उनके पूर्ण पतन को रोक सकती हैं
ली का एल्फा उत्सर्जन स्पेक्ट्रम: इलेक्ट्रॉन बीम से लीफ का अध्ययन
डिग्री या स्किल्स: क्यों टियर-1 कॉलेज आज भी नॉन-टेक जॉब्स की रेस में आगे हैं? 🚀
माँ की लाखों कोशिकाएं आपके अंदर रहती हैं, और अब हम जानते हैं कि यह कैसे होता है
